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Harivansh Rai Bachchan का जीवन परिचय

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27-Nov-2021 35+

Harivansh Rai Bachchan का जीवन परिचय

हरिवंश राय बच्चन हिंदी भाषा के कवी थे, ऐसा माना जाता हैं इनकी कविताओं ने भारतीय साहित्य में परिवर्तन किया था और इनकी शैली पूर्व कवियों से भिन्न थी और यही कारण है कि इनको नई सदी का रचियता कहा जाता हैं । बता दें कि, हरिवंशराय बच्चन का जन्म 27 नंवबर 1907 को इलाहाबाद के पास प्रतापगढ़ जिले के छोटे से गाँव बाबूपट्टी में हुआ को हुआ था इनके पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव था और इनकी माता का नाम सरस्वती देवी था इनकी पत्नी का नाम श्यामा एवम तेजी बच्चन था । इनके दो पुत्र हुए जिनमें से एक नाम ​अजिताभ और दूसरे का नाम अमिताभ बच्चन हैं जो कि सदी के महानायक और बिगबी के नाम से जाने जाते हैं । इसके साथ ही आपको बता दे कि, 18 जनवरी 2003 को इन्होंने अपने जीवन को अलविदा कह दिया मगर आज भी अपनी कविताओं के रूप में ये हम सबके बीच में जीवित हैं, इनकी कविताओं का लयबद्ध रूपांतरण जिसे हम इनके सुपुत्र की आवाज में सुनते हैं बहुत ही मनमोहक लगती हैं ।

इनके मातापिता प्यार से इनको बच्चन कह कर बुलाया करते थे, हरिवंशराय जी अपनी शिक्षा म्युनिसिपल स्कूल से शुरू की थी और उसके बाद वे उर्दू सीखने के लिए कायस्त स्कूल चले गए जहां पर साल 1938 में इन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में एमए किया और 1952 तक वे इसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर भी रहे । इसी दौरान वे देश की स्वतंत्रता के लिए महात्मा गाँधी से भी जुड़ गए मगर कुछ ही समय के बाद उनको ये अहसास हुआ कि वे ज़िन्दगी में कुछ और करना चाहते है और वे फिर बनारस यूनिवर्सिटी चले गए जहां पर साल 1952 में इंग्लिश लिटरेचर में PHD करने के लिए इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी गए जिसके बाद में वे  अपने नाम के आगे श्रीवास्तव की जगह बच्चन लगाने लगे । आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, ये दूसरे ऐसे भारतीय थे जिनको कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हुई थी उसके बाद ये वापस आ गए और फिर से यूनिवर्सिटी में पढ़ने लगे साथ ही साथ ऑल इंडिया रेडियो अलाहाबाद में काम करने लगे ।

हरिवंश बच्चन जब बी.ए. प्रथम वर्ष में थे, उसी दौरान उनकी मुलाकात श्यामा बच्चन से हुई जिसके बाद दोनों के बीच प्रेम हुआ और आखिरकार साल 1926 में दोनों ने सबकी रजामंदी के बाद शादी कर ली । शादी होने के कुछ समय बाद उनकी पत्नी श्यामा बच्चन का अचानक ही निधन हो गया और ये अपने जीवन में अकेले हो गए । उसके बाद वो अपने दोस्त प्रकाश के पास आए जहां उनकी मुलाकात मिस तेजी सूरी से हुई और इन्होंने दोबारा से अपनी लव स्टोरी की शुरूआत की जिसके बाद 24 जनवरी 1942 को हरिवंश राय बच्चन ने तेजी सूरी से शादी कर ली ।

आपको बता देखें कि, साल 1955 में हरिवंशराय जी दिल्ली चले गए और भारत सरकार ने उन्हें विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया । उसके बाद साल 1966 में इनका नाम राज्य सभा के लिए लिया गया था और 3 साल बाद भारत सरकार द्वारा इनको साहित्य अकादमी अवार्ड दिया गया । साल 1976 में हिंदी साहित्य में इनके योगदान के लिए इनको पद्म भूषण से सम्मानित किया गया । हरिवंशराय जी को सरस्वती सम्मान, नेहरु अवार्ड, लोटस अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका हैं । आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, इन्होंने शेक्सपियर की Macbeth and Othello को हिंदी में रूपांतरित किया जिसके लिए इनको हमेशा याद किया जाएगा  1984 में हरिवंशराय जी ने इंदिरा गाँधी की मौत के बाद अपनी आखिरी रचना “1 नवम्बर 1984” लिखी थी ।

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