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प्रधानमंत्री ने 39वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की.

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25-Nov-2021 10:20 AM 16+

प्रधानमंत्री ने 39वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज प्रगति के 39वें संस्करण की बैठक की अध्यक्षता की, जो प्रो एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्पलीमेंटेशन(सक्रिय शासन और समय पर कार्यान्वयन)के लिए आईसीटी आधारित मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें शामिल हैं।

 बैठक में आठ परियोजनाओं और एक योजना सहित नौ एजेंडा विषयों की समीक्षा की गई। आठ परियोजनाओं में, तीन परियोजनाएं रेल मंत्रालय की थीं, दो परियोजनाएं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बिजली मंत्रालय की थीं और एक परियोजना पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की थी।

 इन आठ परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 20,000 करोड़ रुपये हैं। ये योजनाओं सात राज्यों- बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से संबंधित हैं। प्रधानमंत्री ने अधिक लागत से बचने के लिए परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दिया।बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने पोषण अभियान की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पोषण अभियान को सरकार के पूर्ण दृष्टिकोण के साथ प्रत्येक राज्य में मिशन मोड में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने जमीनी स्तर पर बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजीऔर अन्य स्थानीय संगठनों की भागीदारी के बारे में भी बात कीजो अभियान के विस्तार और उसे आगे ले जाने में मदद करेगा।

प्रगति बैठकों के 38 संस्करणों तक, 14.64 लाख करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 303 परियोजनाओं की समीक्षा की जा चुकी है।

प्रगति (PRAGATI - Pro-Active Governance and Timely Implementation):

वर्ष 2015 में लॉन्च किया गया यह एक बहु उद्देश्यीय मंच है जो प्रधानमंत्री को विभिन्न मुद्दों पर जानकारी प्राप्त करने के लिये केंद्र एवं राज्य के अधिकारियों के साथ चर्चा करने में सक्षम बनाता है।

इसे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की टीम ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (National Informatics Center- NIC) की मदद से तैयार किया है।

इस त्रिस्तरीय प्रणाली में पीएमओ, केंद्र सरकार के सचिव और राज्यों के मुख्य सचिव शामिल हैं।

उद्देश्य: इस मंच के तीन उद्देश्य हैं:

o   शिकायत निवारण

o   कार्यक्रम कार्यान्वयन

o   परियोजना की निगरानी

यह मंच तीन प्रौद्योगिकियों (डिजिटल डेटा प्रबंधन, वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग और भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी) को एक साथ लाता है।

महत्त्व: 

यह भारत सरकार के सचिवों और राज्यों के मुख्य सचिवों को एक मंच पर लाता है परिणामतः यह सहकारी संघवाद को बढ़ावा देता है।

यह मंच रियल टाइम उपस्थिति और प्रमुख हितधारकों के बीच विनिमय के साथ ई-पारदर्शिता एवं ई-जवाबदेही हेतु एक मज़बूत प्रणाली है। 

यह ई-शासन और सुशासन हेतु एक अभिनव परियोजना है।

 

 

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