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भारतीय वायु सेना को मिलेगी देश में बनी पहली मिलिट्री सैटेलाइट.

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25-Nov-2021 10:17 AM 14+

भारतीय वायु सेना को मिलेगी देश में बनी पहली मिलिट्री सैटेलाइट

 

 

भारतीय वायुसेना को अपनी खुद की पहली सैटेलाइट मिलने जा रही है। जीसैट-7सी नाम की इस‌ सैटेलाइट की कीमत करीब 2236 करोड़ है और ये पूरी तरह से भारत में ही तैयार करने के बाद भारत से ही लॉन्च किया जाएगा।

इस बावत खुद रक्षा मंत्रालय ने देश की पहली मिलिट्री-सैटेलाइट को खरीदने की अहम मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, मंगलवार को रक्षा  मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में रक्षा अधिग्रहण (खरीद) परिषद की अहम बैठक हुई। बैठक में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के आधुनिकिकरण और ऑपरेशन्ल जरूरतों के लिए मेक इन इंडिया के तहत 2236 करोड़ रूपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

इस‌ प्रस्ताव में जीसैट-7सी सैटेलाइट और ग्राउंड-हब शामिल है। इस‌ सैटेलाइट और ग्राउंड हब का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (एसडीआर) के रियल टाइम कनेक्टेविटी के लिए किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, जीसैट-7सी सैटेलाइट से सशस्त्र सेनाओं की 'लाइन ऑफ साइट' से परे कम्युनिकेशन काफी सुरक्षित और मजबूत हो जाएगी।

आपको बता दें कि हाल ही में वायु‌सेना प्रमुख, वी आर चौधरी ने कहा था कि भारत की जियो-स्ट्रेटेजिक सैटेलाइट भी सेनाओं की सभी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही हैं। उस वक्त वे‌ सह-वायु‌सेना प्रमुख (वाइस चीफ) के पद पर थे। एयर चीफ मार्शल चौधरी ने कहा थ कि भारत  में पूरा स्पेस इको-सिस्टम 'सिविल' प्रणाली का है। इसमें मिलिट्री-भागीदारी की कमी है। ऐसे में देश में सशस्त्र सेनाओं के लिए नेक्सट-जेनरेशन स्पेस टेक्नोलॉजी का अभाव है। लेकिन, जीसैट-7सी अब देश को पहली मिलिट्री-सैटेलाइट मिलने का रास्ता खुल गया है।

क्या होता है एक सैन्य उपग्रह

एक सैन्य उपग्रह एक कृत्रिम उपग्रह है जिसका उपयोग सैन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है। सबसे आम मिशन खुफिया जानकारी, नेविगेशन और सैन्य संचार हैं।

पहले सैन्य उपग्रह फोटोग्राफिक टोही मिशन थे। उपग्रह आधारित हथियारों को विकसित करने के कुछ प्रयास किए गए लेकिन कक्षा में सामूहिक विनाश के हथियारों की तैनाती पर प्रतिबंध लगाने वाली अंतर्राष्ट्रीय संधियों के अनुसमर्थन के बाद 1967 में यह काम रोक दिया गया।

2013 तक, पृथ्वी की कक्षा में सभी प्रकार के 950 उपग्रह हैं। इनमें से सटीक संख्या की पहचान करना संभव नहीं है जो आंशिक रूप से गोपनीयता के कारण सैन्य उपग्रह हैं और आंशिक रूप से दोहरे उद्देश्य वाले मिशन जैसे कि जीपीएस उपग्रह जो नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं। दिसंबर 2018 तक आकाश में 320 ज्ञात सैन्य या दोहरे उपयोग वाले उपग्रह हैं, जिनमें से आधे अमेरिका के स्वामित्व में हैं, इसके बाद रूस, चीन और भारत हैं।

 

 

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